चंद शेर

1.
एक शायरी की शाम होनी चाहिए;
कभी तो बातें आम होनी चाहिए।
बहुत व्यस्त रहते हो हेलो हाय बाय-बाय में;
कभी तो केवल राम राम होनी चहिये॥

2.

सदा चिलचिलाती धूप नहीं, हमें भी छाँव चाहिए;
खुद खड़े हो सकें, ऐसे भी कभी पाँव चहिये।
इस शहर में बसेरा मेरा, वक़्त की गुज़ारिश है,
वरना घर परिवार, अपने-अपनापन, हमें भी वो गाँव चहिये॥

3.

मैंने इंसान की फ़ितरत बदलती देखी है;
ज़ीनत-ए-आबरू की सीरत बदलती देखी है।
देखा है मैंने किस्मतों को बदलते;
मैंने बदलाव की नीयत बदलती देखी है॥

4.
बस ऐसे ही साथ वक़्त के चलती रहती है ज़िन्दगी;
मौसम से बेपरवाह आप ढलती रहती है ज़िन्दगी।
यही इसका फन है, यही इसका नुक़्ता;
धूप हो या छाँव, हमेशा मचलती रहती है ज़िन्दगी॥

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